चंबा में संचालकों ने कहा– ‘बिना एनुअल फीस स्कूल चलाना मुश्किल’ प्राइवेट स्कूलों की फीस पर हंगामा:

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चंबा में संचालकों ने कहा– ‘बिना एनुअल फीस स्कूल चलाना मुश्किल’ प्राइवेट स्कूलों की फीस पर हंगामा:

चंबा समाचार, 26 मार्च 2026 चंबा में एडमिशन फीस को लेकर प्राइवेट स्कूल संगठन की एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान सभी निजी स्कूल संचालकों ने अपने-अपने मुद्दे मीडिया के सामने रखे, ताकि अभिभावकों के सामने अपनी बात सरल तरीके से रख सकें। पिछले कुछ दिनों से एडमिशन फीस का मुद्दा सोशल मीडिया पर काफी तेजी से चर्चा में था, जिसके चलते इस प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

एडमिशन फीस और एनुअल फीस पर सफाई

प्राइवेट स्कूल संचालकों का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की एडमिशन फीस सभी कक्षाओं के लिए नहीं लेते। एडमिशन फीस केवल 1st, 6th, 9th और 11वीं कक्षा में ही ली जाती है। री-एडमिशन फीस के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दरअसल एनुअल फीस होती है, जो स्कूल के संचालन के लिए आवश्यक है।

स्कूल संचालन और खर्चों की चुनौतियां

संचालकों ने बताया कि उन्हें सरकार की ओर से पर्याप्त फंड नहीं मिल पाता। यदि वे एनुअल फीस न लें, तो स्कूल चलाना और अध्यापकों को वेतन देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल के मेंटेनेंस, एडवरटाइजमेंट और अन्य जरूरी कार्यों के लिए खर्च करना पड़ता है। समय के साथ अध्यापकों की सैलरी बढ़ाना भी जरूरी होता है, इसलिए फीस को कम करना उनके लिए संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अभिभावकों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालते और अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार स्कूल का चयन करने के लिए स्वतंत्र हैं।

निजी स्कूलों में अध्यापकों की सैलरी: एक अनदेखा मुद्दा

प्राइवेट स्कूलों में अध्यापकों की सैलरी एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। हैरानी की बात यह है कि बच्चों से ली जाने वाली फीस के बावजूद कई अध्यापकों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल पाता अध्यापकों पर अच्छे परिणाम देने का दबाव रहता है, लेकिन उनकी सैलरी इतनी कम होती है कि वे अपना गुजारा भी मुश्किल से कर पाते हैं। आज के समय में सरकारी नौकरियां सीमित हैं, और हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल पाती। ऐसे में निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।