सरकार से नाराजगी
गांव के लोग प्रधान, विधायक, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार उन्हें मरा हुआ घोषित कर दे तो बेहतर है, क्योंकि उनके गांव में न सड़क है, न स्वास्थ्य सुविधाएं हैं और न ही मोबाइल नेटवर्क की व्यवस्था है।
नेताओं पर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं, लेकिन उसके बाद उनकी कोई सुध नहीं लेते। गांव के लोगों का आरोप है कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं—जैसे सड़क, स्वास्थ्य और संचार—आज तक उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं। इसी कारण उन्होंने पहले भी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था और अब पंचायत चुनाव का भी बहिष्कार करने का फैसला लिया है।
मांगें और चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे आगे विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार करेंगे। उन्होंने गांव में एलोपैथिक अस्पताल की मांग भी उठाई है, क्योंकि उन्हें इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक हालात नहीं बदले हैं, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है।
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